Saturday, October 3, 2009

आदेश के इंतजार में अटकी काउंसलिंग

राज्य सरकार की लापरवाही के चलते बैठे-ठाले ही बीएड कॉलेजों के शिक्षा सत्र में करीब एक माह का विलम्ब हो गया है। पीटीईटी की तीसरे चरण की ऑन लाइन काउंसलिंग निरस्त करने के बाद राज्य सरकार के नुमाइंदे इस बात को भूल बैठे हैं कि तीसरे दौर की काउंसलिंग दुबारा भी करानी है।
कब सरकार का आदेश मिलेगा और कब काउंसलिंग होगी। पीटीईटी आयोजक जोधपुर का जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय इस बारे में अभ्यर्थियों को कोई जवाब देने की स्थिति में नहीं है। राज्य सरकार ने राजस्थान हाइकोर्ट जयपुर बैंच के आदेशानुसार सात नए कॉलेजों को काउंसलिंग प्रक्रिया में शामिल करने के लिए पीटीईटी की तीसरे चरण की काउंसलिंग गत 14 सितम्बर को निरस्त कर दी गई थी। इसके करीब बीस दिन बाद भी काउंसलिंग दुबारा होने का कोई अता-पता नहीं है।
जवाब भी नहीं मिलतापरेशान अभ्यर्थियों के पीटीईटी कार्यालय में लगातार फोन आ रहे हैं, लेकिन यही जवाब मिलता है कि सरकार का आदेश आएगा तभी काउंसलिंग होगी। सूत्र बताते हैं कि काउंसलिंग के लिए विवि कई बार राज्य सरकार को आग्रह कर चुका है लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं हुआ है।
गडबडाने लगा शिक्षा सत्रकाउंसलिंग में हो रही देरी से बीएड कॉलेजों का शिक्षा सत्र गडबडाने लगा है। नियमानुसार 180 दिन की पढाई पूरी होने पर ही बीएड की मुख्य परीक्षा कराई जा सकती है। बीएड कॉलेजों के शिक्षा सत्र की शुरूआत अन्तिम प्रवेश के दिन से मानी जाती है। अनुमति मिलने के बाद काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी करने में विश्वविद्यालय को पन्द्रह दिन का वक्त लगेगा। इसके बाद दीपावली अवकाश आ जाएगा।

शिक्षकों का धरना-प्रदर्शन

राजसमंद। राजस्थान शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) जिला शाखा ने पातेय वेतन पर शिक्षकों की पदोन्नति के विरोध सहित अन्य मांगों को लेकर जिला मुख्यालय पर धरना व प्रदर्शन किया। शिक्षक सुबह पुरानी कलक्टरी से रैली के रूप में कलक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री के नाम जिला कलक्टर को ज्ञापन सौंपा।

जिलाध्यक्ष प्रभुगिरि गोस्वामी व संगठन मंत्री गिरिजाशंकर पालीवाल के नेतृत्व में हुए धरना प्रदर्शन में शिक्षकों ने पातेय वेतन पर पदोन्नति का विरोध किया। शिक्षकों ने विभाग की ओर से आए दिन समानीकरण के मापदण्डों में परिवर्तन करने पर भी रोष व्यक्त किया। ज्ञापन देने के दौरान प्रतिनिघिमंडल में सभाध्यक्ष किशनसिंह चुण्डावत, प्रांतीय उपाध्यक्ष यशोदा दशोरा, महिमा मंत्री उर्मिला पुरोहित, नीरा जोशी व राजेन्द्रसिंह चारण सहित जिले भर से शिक्षक नेता मौजूद थे।

युवक गिरफ्तार, मोटरसाइकिल जब्त

कुंवारिया। कस्बे के बस स्टैण्ड पर गुरूवार रात संदिग्ध अवस्था में खडे एक युवक को पुलिस ने गिरफ्तार करते हुए उसकी मोटरसाइकिल जब्त कर ली। कार्यवाहक थाना प्रभारी सज्जन सिंह ने बताया कि गुरूवार देर रात गश्त के दौरान बस स्टैण्ड पर सराय के समीप खडे भादला (बूंदी) निवासी संजय गुर्जर को गिरफ्तार कर मोटरसाइकिल जब्त की गई।
आरोपी को शुक्रवार को न्यायालय में पेश किया, जहां उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया।

जेवरात हडपने का आरोप

देवगढ। थाना क्षेत्र के शक्करगढ निवासी एक विवाहिता ने गुरूवार को थाने में आठ जनों के खिलाफ उसे अन्यत्र नाते देने व जेवरात हडपने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज करवाई। शक्करगढ निवासी सुशीला ने पुलिस में दर्ज रिपोर्ट में बताया कि उसकी शादी गत 18 अप्रेल 09 को लक्ष्मण सिंह रावत के साथ हुई थी।
अब, श्रवण सिंह, केसी, माया, रघुवीर सिंह, हाम सिंह तथा मिट्ठू सहित आठ लोग उसे अन्यत्र नाते देना चाहते हैं। साथ ही पति द्वारा चढाए गए जेवरात भी हडपना चाहते हैं। पुलिस प्रकरण दर्ज कर मामले की जांच कर रही है।

आग से घास व पेड खाक

लावासरदारगढ। केलवा थाना क्षेत्र के जेतपुरा गांव में शुक्रवार दोपहर आग लगने से घास व पेड खाक हो गए। घटना की जानकारी होने के बाद मौके पर पहुंचे दमकल कर्मियों ने काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग की चपेट में आने से एक युवक झुलस गया।
थाना प्रभारी महावीर शर्मा ने बताया कि गांव में दोपहर करीब तीन बजे मांगीलाल पुत्र तुलसा सुथार, नाथू पुत्र गोकुल खटीक, भैरूलाल सुथार तथा गोपा पुत्र रूपा सुथार सहित आठ जनों के खेत में आग लग गई। आग की चपेट से खेत के घास व वहां मौजूद पेड खाक हो गए।
ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना दमकल कर्मियों को दी। घटना की जानकारी होने के बाद मौके पर पहुंचे कर्मचारियों ने कडी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया। आग की चपेट में आने से भैरूलाल गंभीर रूप से झुलस गया, जिसे उपचार के लिए आर.के. चिकित्सालय पहुंचाया गया। आग लगने के कारणों का पता नही चल सका है।

बालक तालाब में डूबा

देलवाडा। देलवाडा थाना क्षेत्र में शुक्रवार दोपहर एक बालक तालाब में डूब गया। वह बडे भाई के साथ तालाब में नहाने गया था। पुलिस ने बताया कि देलवाडा निवासी गजेन्द्र यादव (8) पुत्र सुभाष यादव दोपहर करीब बारह बजे बडे भाई श्रीकांत के साथ बस स्टैण्ड के समीप स्थित पालेरा तालाब में नहाने गया था, जहां गहराई में जाने से डूब गया।
घटना की जानकारी होने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में उसका पोस्टमार्टम करवाया। गजेन्द्र तीन भाइयों में सबसे छोटा था और राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय में कक्षा तीन का छात्र था। उसके पिता राजगीर हैं। बडा भाई श्रीकांत उसी विद्यालय में कक्षा पांच का छात्र है।

जे.के. फैक्ट्री में काम बंद

राजसमंद। जिला मुख्यालय स्थित जे.के. टायर फैक्ट्री पर आखिर शुक्रवार को प्रबंधन ने ताले लगा कर ढाई हजार कामगारों को घर बैठा दिया। इस फैक्ट्री में 16 सितम्बर से उत्पादन बाधित था। जिला प्रशासन ने इसे 'संस्पेंशन ऑफ वर्क' बताते कहा कि यह 'लॉक आउट' नहीं है। प्रबंधन ने फैक्ट्री बंद करना मजबूरी बताया है। सुबह पौने सात बजे जे.के. प्रबंधन ने फैक्ट्री के बाहर सूचना बोर्ड पर तालाबंदी का नोटिस चस्पा करने के बाद सभी कामगारों को बाहर निकाल कर फैक्ट्री के भीतरी द्वार पर अंदर की ओर से ताला लगा दिया।
तालाबंदी के विरोध में श्रमिक संगठन सीटू ने फैक्ट्री में नारेबाजी और धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया। तैंतीस वर्ष पूर्व स्थापित इस फैक्ट्री में उत्पादन प्रक्रिया पूरी तरह ठप होने के कारण तीसरी बार तालाबंदी की नौबत आई है। ऎसा माना जा रहा है कि प्रबंधन कई कामगारों की छंटनी के बाद ही फैक्ट्री में उत्पादन प्रक्रिया फिर से शुरू करेगा।
उल्लेखनीय है कि गत 19 दिनों से जे.के. टायर एम्पलाइज यूनियन इंटक की ओर से फैक्ट्री के मुख्य द्वार पर मान्यता देने व चुनाव कराने की मांग को लेकर धरना दिया जा रहा था। सीटू पदाधिकारियों ने फैक्ट्री पर तालाबंदी के लिए इंटक को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि इंटक इसे सीटू की गलत नीतियों का नतीजा बता रही है।
-जेके फैक्ट्री प्रबंधन की ओर से शुक्रवार को 'सस्पेंशन ऑफ वर्क' की अघिकारिक सूचना दी गई है। फैक्ट्री प्रबंधन इसे 'लॉक आऊट' नहीं बता रहा है। इससे पूर्व कई चरणों में प्रबंधन और कर्मचारियों की बातचीत हुई थी। कोई ठोस नतीजा नहीं निकलने पर प्रबंधन ने यह कदम उठाया गया है। -औंकार सिंह, जिला कलक्टर, राजसमंद
वेतन और बोनस पर भी संकटजे.के. फैक्ट्री में इंटक के धरना-प्रदर्शन व सभाओं से उत्पादन प्रक्रिया बाघित होने के बाद दिवाली से पूर्व बोनस के संबंध में प्रबंधन व श्रमिक संगठन के बीच कोई वार्ता नहीं हो सकी। हालांकि प्रबंधन ने पहले ही 'काम नहीं तो वेतन नहीं' का ऎलान भी कर दिया था। तालाबंदी के कारण अब फैक्ट्री में कार्यरत 643 बदली श्रमिक, 1395 स्थायी श्रमिक व करीब 500 ठेका श्रमिकों को ना तो बोनस और ना ही वेतन मिल पाएगा।
16 सितम्बर से उत्पादन ठपइंटक की ओर से करीब पौन माह पूर्व 16 सितम्बर से धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया गया था। कई कामगारों के इसमें शामिल होने से फैक्ट्री में उत्पादन प्रक्रिया बाघित होना शुरू हो गई थी। प्रबंधन ने उत्पादन प्रक्रिया बहाली के लिए समाचार पत्रों व पत्रकों के माध्यम से कामगारों से कई बार आग्रह भी किया।
पुलिस ने किया बीच-बचावतालाबंदी के बाद सीटू ने ताले खोलने व इंटक ने चुनाव की मांग को लेकर फैक्ट्री परिसर में जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। परस्पर आरोप-प्रत्यारोप के बीच दोनों संगठनों में झडप की स्थिति पैदा हो गई। इस बीच पहले से ही मौके पर मौजूद भारी पुलिस बल ने बीच-बचाव किया। फैक्ट्री गेट पर संगठनों के पदाघिकारियों-कर्मचारियों का भारी जमावडा होने से कई बार स्थिति तनावपूर्ण बनी। मामले की नजाकत को समझते हुए पुलिस उप अधीक्षक सी.पी. शर्मा के नेतृत्व में भारी संख्या में पुलिस बल, उपखण्ड अघिकारी अशोक कुमार, तहसीलदार अमृतलाल डामोर आदि मौके पर ही डटे रहे।
इंटक कामगारों को भगायाबाहरी गेट पर जमा सीटू पदाघिकारियों ने इंटक से संबद्ध किसी भी कामगार को धरना स्थल की ओर नहीं जाने दिया। कुछ कामगारों के प्रयास करने पर सीटू पदाघिकारी लाल झंडे दिखाते हुए झंडे के डंडे लेकर पीछे दौडे तब उप अधीक्षक सहित अन्य पुलिस कर्मियों ने बीच-बचाव किया।
तीसरी बार तालाबंदीकांकरोली स्थित इस फैक्ट्री में तीसरी बार तालाबंदी की नौबत आई है। अक्टूबर 1976 में स्थापना के बाद सबसे पहले वर्ष 1986 में करीब 21 दिन व 31 दिसम्बर 1995 से करीब 1 माह तक तालाबंदी रही। इस दौरान वर्ष 1987 व 1992 में 54 दिन की हडताल हुई थी। तालाबंदी और हडताल के दौरान हर बार उत्पादन प्रक्रिया बाघित रही थी।
कोई मांग स्वीकार नहीं होगी : प्रबंधनजेके टायर प्रबंधन ने शुक्रवार को फैक्ट्री में 'कार्य के निरस्तीकरण' की घटना को अफसोस जनक बताया है। प्रबंधन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष व यूनिट हैड ए.के. मक्कड ने यहां आयोजित प्रेसवार्ता में बताया कि अक्टूबर 08 से श्रम संगठन व प्रबंधन के बीच वर्ष 2011 तक के लिए हुए करार को किसी भी सूरत में न तो रद्द किया जा सकता है और न ही फेरबदल की गुंजाइश है क्योंकि यह करार नब्बे फीसदी कामगारों की सहमति से हुआ था।
इंटक अगर चाहे तो बहुमत का दावा संयुक्त श्रम आयुक्त के सामने पेश करे। करार के तहत कामगारों को ढाई करोड रूपए एरियर के तौर पर दिए जा चुके हैं व साढे तीन करोड रूपए सालाना वेतन के तौर पर दिए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उत्पादन ठप होने से रोजाना साढे तीन करोड रूपए का राजस्व नुकसान हो रहा है और ऎसे में तालाबंदी मजबूरी है। इस बारे में इंटक के प्रदेश अध्यक्ष भैरूलाल मीणा से चर्चा हुई थी और उन्होंने भी इंटक पदाघिकारियों से कारखाना बंद नहीं करने का आग्रह किया था।
मक्कड ने कहा कि जेके प्रबंधन ने हाल ही कारखाने के विस्तार के लिए सौ करोड रूपए की मंजूरी दी थी। अब इस बडे निवेश के संबंध में प्रबंधन सोचने पर मजबूर हो गया है। उन्होंने कहा कि कारखाने से रोजाना 207 टन उत्पादन होता था। इससे राज्य सरकार को सालाना डेढ सौ करोड रूपए राजस्व मिलता है।
इनका कहना हैकरार के लाभ सभी कामगारों ने लिए है, लेकिन कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद इंटक ने कामगारों को भ्रमित करना शुरू कर दिया। हम लोग काम करना चाहते हैं। तालाबंदी से नुकसान उठाना पडेगा। राज्य सरकार ने भी मामले के निस्तारण में कोई रूचि नहीं दिखाई। - बंशीलाल कलाल, महामंत्री सीटू
तालाबंदी प्रबंधन और सीटू की सोची समझी साजिश है। इसका खमियाजा कामगारों को भुगतना पडेगा। करार का पहले दिन से ही विरोध किया जा रहा था। आज की स्थिति के लिए पूरी तरह से सीटू जिम्मेदार है। - वीरेन्द्र मिश्रा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष, इंटक