Friday, November 6, 2009

आरोपियों को जेल भेजा

देलवाडा। क्षेत्र के मजेरा इलाके में पिछले दिनों नकली शराब परिवहन के आरोप में गिरफ्तार पदम सिंह झाला को पुलिस ने शुक्रवार को न्यायिक मजिस्टे्रट के समक्ष पेश किया जहां उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया।
इसी प्रकार कस्बे के कुण्ड चौराहे पर गत दिनों तलवार से हमला कर दौला पुत्र लखमा गमेती को घायल करने के आरोप में गिरफ्तार बेदला निवासी देवेन्द्र सिंह पुत्र विजय सिंह व सरडाया निवासी भीम सिंह पुत्र कालू सिंह को भी पुलिस ने न्यायिक मजिस्टे्रट के समक्ष पेश किया जहां उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

विवाहिता कुएं में कूदी

देवगढ। जिले के दिवेर थाना में रत्ना का गुडा गांव में शुक्रवार सुबह एक विवाहिता ने कुएं में छलांग लगा दी। कुएं में कूदने से पहले उसने अपने चार वर्षीय पुत्र को कुएं के पास बैठा दिया था। दिवेर थानाधिकारी भैयालाल आंजणा ने बताया कि हादसा सुबह करीब साढे दस बजे हुआ। रत्ना का गुडा निवासी सायरी बाई (40) पत्नी वन्नाराम सालवी अपने चार वर्षीय पुत्र के साथ घर से थोडी दूर पर स्थित सार्वजनिक कुएं पर पहुंची।
वहां उसने पुत्र को कुएं के पास बैठा दिया और खुद छलांग लगा कर आत्महत्या कर ली। घटनास्थल स्थल से थोडी दूर पर काम कर रहा भगवानलाल पुत्र सेसूराम सालवी जब तक कुछ कर पाता, विवाहिता डूब चुकी थी। घटना की जानकारी के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने शव बाहर निकलवाया और स्थानीय पीएचसी में पोस्टमार्टम के बाद उसे परिजनों को सौंप दिया। विवाहिता के कुएं में कूदने का कारण मालूम नहीं हो सका है। पुलिस ने भगवानलाल की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

मधुमक्खी पालन आम के आम, गुठलियों के दाम

राजसमंद आम के आम गुठलियों के दाम, शहद का स्वाद कभी फीका नहीं होता...। इन दिनों रेलमगरा पंचायत समिति क्षेत्र के गिलूण्ड व आसपास के इलाकों में क्षेत्रीय काश्तकार अजवाइन की फसल के साथ मधुमक्खी पालन कर दोहरा लाभ कमा रहे हैं, उन्हें इसके लिए बाकायदा प्रशिक्षित किया जा रहा है।
डबल फायदे का यह कारोबार गिलूण्ड से मातृकुण्डिया मार्ग पर डिण्डोली फीडर के किनारे अजवाइन के तीन खेतों में किया जा रहा है। राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन बोर्ड से प्रशिक्षित मध्य प्रदेश के कुछ मधुमक्खी पालक परिवार इन दिनों इस क्षेत्र में अजवाइन के खेतों में यह व्यवसाय कर क्षेत्र के काश्तकारों को अपनी आमदनी बढाने के जरिये बता रहे हैं।
ऎसे होता है मधुमक्खी पालनमधुमक्खी पालन व्यवसाय से जुडे मुरैना (मध्य प्रदेश) के निवासी नरेशकुमार त्यागी ने बताया कि इस व्यवसाय के लिए राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन बोर्ड की ओर से मानक नाप के लकडी के बक्से प्रदान किए जाते हैं। प्रत्येक बक्से में 30 हजार से एक लाख की संख्या तक मधुमक्खियां होती हैं। प्रत्येक बक्से में एक मादा रानी रहती है, जो बक्से में ही रह कर अण्डे देने का कार्य करती है। शेष बक्से से बाहर जाकर पराग लाने व शहद बनाने का काम करती हंै। उन्होंने बताया कि इस परिवार के सदस्य खेतों में से पराग लाकर पुन: उसी बक्से में ही प्रवेश करते हैं।
स्थापित होते हैं चार सौ बक्सेएक एक खेत में तीन से चार सौ बक्सों को स्थापित किया जाता है। इन बक्सों में लकडियों के फ्रेमनुमा ढांचे पर मोम का बना कृत्रिम छत्ता लगाया जाता है जिस पर मधुमक्खियां छत्ता बना कर रहने व शहद बनाने का काम करती हैं। फसल पर फूल रहने तक यह क्रम जारी रहता है। फसलों में फूल समाप्त होने के समय तक प्रत्येक बक्से में सात से आठ किलो तक शहद बन कर तैयार हो जाता है।
फसल पैदावार में भी वृद्धि इस व्यवसाय से जुडे किसानों का कहना है कि मधुमक्खियों द्वारा फूलों से किए जाने वाले पर परागण से फसल बढती है। यह सब कुछ इतना प्राकृतिक तरीके से किया जाता है कि इससे मधुमक्खियां नष्ट होने का भी कोई खतरा नहीं रहने के साथ बाजार में जाने वाले शहद में कोई मिलावट नहीं रहती। उन्होंने बताया कि मधुमक्खियों द्वारा फसलों के फूलों से लिए जाने वाले पराग से उपज में 10 से 50 फीसदी तक बढोतरी भी हो जाती है।
ऎसे निकलता है शहदछत्तों को बक्सों से निकाल कर विशेष प्रकार से बनाई गई हस्तचलित मशीन में लगी लोहे की पत्तियों के सहारे खडा कर मशीन को घुमाया जाता है जिससे छत्ते का पूरा शहद नीचे निकल कर एकत्रित हो जाता है। विशेष रूप से तैयार की गई यह मशीन पूणत: हस्तचलित होने से इसमें मधुमक्खियां मरने का किसी प्रकार का खतरा नहीं रहता। बाद में इस शहद को मशीन के पैंदे में लगी टूंटी से डिब्बों में भर कर बाजार में बिक्री के लिए ले जाया जाता है।

पहचान लटकी ड्राइवरों के गले में

राजसमंद। जिला मुख्यालय पर पंजीकृत तमाम ऑटो चालकों को यहां बाण्डियावाडा स्थित यातायात पुलिस कार्यालय में शुक्रवार को एक सादे समारोह में जिला पुलिस अधीक्षक ने परिचय पत्र जारी किए। ये परिचय पत्र गले अथवा शर्ट की जेब पर लगाना सभी के लिए अनिवार्य होगा।
राजसमंद में सभी ऑटो चालकों के लिए पूरी वर्दी और परिचय पत्र अनिवार्य किए गए हैं। सुबह ग्यारह बजे यातायात पुलिस कार्यालय के परिसर में जिला मुख्यालय पर चलने वाले तमाम ऑटो चालकों का जमावडा लगा था। परिसर में बने मंच से यातायात प्रभारी योगेश चौहान ने चालकों का नाम पुकारना आरंभ किया और बारी-बारी से पहुंचे चालकों को पुलिस अधीक्षक डॉ. नितिनदीप ब्लग्गन ने उनके गले में परिचय पत्र पहनाए।
हर तरफ खाकीकार्यालय में बनाई गई बैठक दीर्घा और मंच पर भी खाकी वर्दी नजर आई। एक तरफ ऑटो चालक थे तो दूसरी ओर पुलिस अधीक्षक व अन्य अघिकारी। फर्क सिर्फ इतना था कि पुलिस अघिकारियों के कंधों पर बैज, सितारे और सिर पर टोपी थी।
परिचय पत्र में पूरा विवरण पुलिस अधीक्षक डॉ. ब्लग्गन, उप अधीक्षक वासुदेव भट्ट आदि की मौजूदगी में दिए यातायात पुलिस की ओर से दिए गए परिचय पत्र में संबंघित चालक का नाम, फोटो, चालक के पिता का नाम, मोबाइल अथवा घर के संपर्क नम्बर, पूरा पता, वाहन का प्रकार व लाइसेंस नंबर आदि का अंकन किया गया है।
दुर्घटनाएं चिंताजनकइस अवसर पर पुलिस अधीक्षक डॉ. ब्लग्गन ने शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए सभी चालकों व शहरवासियों का आह्वान किया। उन्होंने साल दर साल बढती सडक दुर्घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सावधानी बरतने की भी सलाह दी।

Monday, November 2, 2009

रातीतलाई गांव बीमार

केलवा (राजसमंद)। कुंभलगढ तहसील में अटालिया ग्राम पंचायत का रातीतलाई गांव वायरल बुखार की चपेट में आ गया है। चिकित्सा विभाग ने सौ घरों की आबादी वाले इस गांव में 84 लोगों के बीमार होने की पुष्टि की है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि रोगियों की तादाद सौ से अघिक है। एक साथ इतने लोगों के बीमार होने की खबर से चिकित्सा महकमे में खलबली मच गई है। इस पर चिकित्सक टीम ने सोमवार को घर-घर जाकर इलाज शुरू किया।
ग्रामीणों ने बताया कि पूरा गांव पिछले डेढ माह से वायरल की चपेट में है। हालांकि अब तक बीमारी के चलते कोई जनहानि नहीं हुई है। ग्रामीणों में फैली इस बीमारी के नाम का लक्षणों के आधार पर कोई पता नहीं चल पाया है। डॉ. रमेशचंद्र मीणा ने बताया कि जांच के लिए 29 रोगियों के रक्त की स्लाइडें व पानी के नमूने लिए गए हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही बीमारी का खुलासा हो पाएगा।
नर्स कौशल्या ने बताया कि पूर्व में की गई खून की जांच में मलेरिया निगेटिव पाया गया था। कंपाउंडर बनवारीलाल चौधरी सहित आधा दर्जन से अघिक चिकित्सकों की टीम ने घर-घर पहुंच कर गांव के चौराहे पर उपचार शुरू कर दिया है। रोगियों को पीसीएम, कोटराइन आक्साइज, सेफेक्शन, ए फाल्ट टिकिया, सीपीएम आदि दवाइयां दी जा रही हैं।
पूरा परिवार ही बीमारकई घरों में तो सारे लोग ही बीमारी की चपेट में आ गए हैं। ऎसे में उनकी देखभाल करने वाला भी कोई नहीं बचा है। चिकित्सकों ने सायर (38) पत्नी मोहनबलाई, उसकी पुत्री कैलाश (6), जोदाराम बलाई, वरदा बलाई (60), भंवरसिंह (60), किशनलाल (50), पुष्पा (50), उदयसिंह (25), पुष्पा (32), किशन (40), वरदी बाई (60), मीठूसिंह (8), हुंकारलाल सुथार (60), राकेश (6), भूरसिंह (65), गीता (50), बहादुरसिंह (50), महेता कुंवर (25), दरिया कुंवर (20), गोकुल (50), धनसिंह (55) सहित 84 जनों का मौके पर उपचार किया।
दो बार लगे शिविरगांव में पिछले माह तीन व पांच अक्टूबर को नि:शुल्क चिकित्सा शिविर लगे थे। शिविर में तीनों ही पद्धतियों के चिकित्सकों ने गांव के शताघिक लोगों का उपचार कर दवाइयां दी थीं। गौरतलब है कि गांव में शिविर लगने से पूर्व ही वायरल फैल चुका था व कई ग्रामीण इसकी चपेट में थे। ग्रामीणों के मुताबिक रोगियों में हर आयु वर्ग के लोग शामिल हैं। सभी को सामान्य लक्षणों के तौर पर हाथ-पैरों में जकडन के अलावा ठंड के साथ तेज बुखार की शिकायत है।
मुझे आज ही जानकारी मिली है। मौके पर चिकित्सा टीम को भेजा गया है। हालांकि स्थिति नियंत्रण में हैं। मौके पर पहुंचे चिकित्सक के मुताबिक सामान्य वायरल की शिकायत है। मैं कल मौके पर जाकर देखूंगा।डॉ. एम.एल. देवडा, मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अघिकारी, राजसमंद

चार जुआरी गिरफ्तार

पालिया रोड स्थित शराब के ठेके के पास जुआ खेलते चार जुआरियों को गिरफ्तार कर उनसे ताश के पत्तों समेत पांच हजार रूपए बरामद किए हैं।
पुलिस ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर हैड कांस्टेबल वीरेन्द्रसिंह मय जाब्ता सात पालिया रोड पर शराब के ठेके के पीछे पहंुचे, जहां जुआ खेल रहे दिवेर निवासी कन्हैयालाल पुत्र डालू खटीक, त्रिलोक सिंह पुत्र खीम सिंह रावत, नैनू सिंह पुत्र देवी सिंह रावत और मानसिंह पुत्र लालसिंह रावत को गिरफ्तार कर उनसे ताश के पत्ते व साढे चार हजार रूपए बरामद किए गए। जुआरियों के खिलाफ गैंबलिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

पहाड पर भीषण आग

देलवाडा। कस्बे के पूर्वी छोर पर कांटिया पहाड पर सोमवार को भडके दावानल से लगभग बारह बीघा खडी घास के साथ बीडे में रखा चारा राख हो गया। आग के कारणों का पता नहीं चल सका है। जानकारी के अनुसार कांटिया पहाड पर लगी आग विकराल रूप धारण करते हुए कस्बे के भैरूलाल खटीक व जसवन्त नाई के बीडे तक जा पहुंची। पहाडी क्षेत्र होने के कारण दमकल वहां तक नहीं पहुंच सकी।
ऎसे में ग्रामीण जब तक आग पर काबू पाते, इसकी चपेट में 15 हजार पूले घास व चारा राख हो गया। हालांकि ग्रामीण भी आग बुझाने में नाकाम रहे। यह गनीमत रही कि बीडे के चारों ओर पत्थर की निर्मित चारदीवारी से आग फैलने से रूक गई और बडा हादसा टल गया। आग के कारणों का पता नहीं चल सका है।