Tuesday, January 24, 2012

मुख्य समारोह में उत्कृष्ट कार्यो के लिए 50 प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा


राजसमन्द। जिला स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह कांकरोली के बालकृष्ण स्टेडियम में समारोह पूर्ववक आयोजित होगा। जहां उल्लैखनीय सेवाओं के लिए 50 प्रतिभाओं को सम्मानित किया जाएगा।
जिला कलक्टर डॉ.प्रीतम बी यशवन्त ने बताया कि प्रदीप सैनी माली छात्र कक्षा 8, श्रीजी पब्लिक सी.सै.वि. नाथद्वारा को रा0उ0मा0वि0, सिन्धुनगर, भीलवाडा में आयोजित बेडमिन्टन (छात्र) दलीय स्पर्धा में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर समृति चिन्ह एवं प्रसंषा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा। इसी प्रकार इसी प्रतियोगिता में अविनाश कंठालिया छात्र कक्षा 8 श्रीजी पब्लिक सी.सै.वि. नाथद्वारा को रा0उ0मा0वि0 को, ऋतिक कुमावत छात्र कक्षा 8 श्रीजी पब्लिक सी.सै.वि. नाथद्वारा को, मनन जैन, छात्र कक्षा 6 दा क्रियेटिव ब्रेन एकेडमी नाथद्वारा तथा ऋषि स्वर्णकार, कक्षा 8 दा क्रियेटिव ब्रेन एकेडमी नाथद्वारा को स्मृति चिन्ह एवं प्रषंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।
सुश्री भंवरी मीणा छात्रा, कक्षा-6 रा0उ0प्रा0वि0, मोडवा पं0स0 खमनोर को 56 वीं राज्य स्तरीय उ0प्रा0वि0 खेल प्रतियोगिता 2011-12 में जूडो प्रतियोगिता मे राज्य स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर स्वर्ण पदक एवं राष्ट्रीय स्तर पर तृतीय स्थान प्राप्त कर कांस्य पदक प्राप्त करने पर, सुश्री चेतना मेघवाल छात्रा कक्षा-6, रा0उ0प्रा0वि0 मोडवा (खमनोर) को 56 वीं राज्य स्तरीय उ0प्रा0वि0 खेल प्रतियोगिता 2011-12 में जूडो प्रतियोगिता मे राज्य स्तर पर द्वितीय स्थान प्राप्त कर रजत पदक एवं राष्ट्रीय स्तर पर तृतीय स्थान प्राप्त कर कांस्य पदक प्राप्त करने पर ,बाबुलाल लौहार छात्र 12 वीं कला वर्ग रा0उ0मा0वि0, कोठारिया (नाथद्वारा) को प्रथम राज नेवल यूनिट एन.सी.सी. उदयपुर द्वारा आयोजित शिविर में स्थानीय ट्रूप को प्रथम स्थान दिलवा विधालय और तहसील का नाम रोशन करने पर, सुश्री उगमा जाट छात्रा कक्षा 9 वीं रा0मा0वि0, लापस्या (रेलमगरा) को शैक्षिक व सहशैक्षिक क्षैत्रों में तहसील, जिला एवं राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर खो-खो व एथलेटिक्स प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर जिला व राज्य का प्रतिनिधित्व कर पूरे संभाग में राजसमंद जिले व देश में राजस्थान व गांव का नाम रोशन करने पर, सुश्री प्रीति खटीक छात्रा कक्षा 10 रा0बा0मा0वि0, कुरज (रेलमगरा) को राष्ट्रीय स्तर पर हॉकी खेलकूद प्रतियोगिता में भाग लेने तथा स्थानीय विधालय एवं जिले का प्रतिनिधित्व करने पर, सुश्री भावना जाट छात्रा कक्षा 10, रा0मा0वि0 काबरा (रेलमगरा) को सत्र 2010 व 2011 में राज्य स्तरीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में गोल्ड मेडल प्राप्त करने एवं 56 वीं राष्ट्रीय एथलेटिक्स प्रतियोगिता में राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान को चौथा स्थान दिलाने पर सम्मानित किया जाएगा।
जिला कलक्टर ने बताया कि गगन त्रिवेदी छात्र कक्षा 9 सुबोध ज्ञान मंदिर माध्यमिक विधालय देवगढ़ को 37 वीं राष्ट्रीय बास्केटबॉल प्रतियोगिता, कांगडा (हिमाचल प्रदेश) में राजस्थान टीम का प्रतिनिधित्व कर राजस्थान सब जुनियर ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में ‘‘स्वर्ण पदक’’ प्राप्त करने पर, श्री अभिमन्यु शर्मा छात्र कक्षा 9 आलोक सीनियर सैकण्डरी स्कूल, राजसमंद को वर्ष 2010-11 में नासिक (महाराष्ट्र) में आयोजित राष्ट्रीय टेबल टेनिस प्रतियोगिता में राजस्थान राज्य का कप्तान के रूप में टीम का प्रतिनिधित्व करने एवं राष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिता में भाग लेने पर, ऋषुल गोस्वामी गिरिराज पुरा नाथद्वारा को देहरादून (उत्तराखण्ड) में सम्पन्न हुई चतुर्थ राष्ट्रीय किक बाक्सिंग चैम्पियन शिप प्रतियोगिता में राजस्थान का प्रतिनिधित्व करते हुए 48 किलोग्राम भार वर्ग की स्पर्धा में प्रथम स्थान प्राप्त कर राष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक प्राप्त करने पर, सुनिल गुर्जर छात्र कक्षा-10 उम्र 15 वर्ष निवासी वासनी तहसील राजसमंद को दिनांक 10.09.2011 को ग्राम वासनी के तालाब में दो युवतियों में से एक युवती श्रीमती उमा भील को अदम्य साहस का परिचय देकर डूबने से बचाने पर, यश चोरडिया छात्र कक्षा 9 वीं लक्ष्मीपत सिंघानिया स्कूल, जे0के0ग्राम, कांकरोली को दिनांक 05 जनवरी से 11 जनवरी तक चंडीगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय स्कूली क्रिकेट प्रतियोगिता (16 वर्षीय) में राजस्थान टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रतियोगिता में सराहनीय प्रदर्शन करने पर, प्रशांतसिंह चौधरी छात्र कक्षा 10, लक्ष्मीपत सिंघानिया स्कूल, जे0के0ग्राम, कांकरोली को दिनांक 05 जनवरी से 11 जनवरी तक चंडीगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय स्कूली क्रिकेट प्रतियोगिता (16 वर्षीय) में राजस्थान टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए प्रतियोगिता में सराहनीय प्रदर्शन करने पर, आदित्य सिंह राठौड़ छात्र कक्षा 7 लक्ष्मीपत सिंघानिया स्कूल, जे0के0ग्राम, कांकरोली को मुम्बई (महाराष्ट्र) में आयोजित राष्ट्रीय क्रिकेट प्रतियोगिता (14 वर्षीय) में राजस्थान टीम का प्रतिनिधित्व करते हुए सम्पूर्ण प्रतियोगिता में सराहनीय प्रदर्शन करने पर, रिजवान फारूक लोदी अति0 ब्लॉक प्रा0शि0 अ0 खमनोर को ग्राम सेवक भर्ती परीक्षा, पटवार भर्ती परीक्षा-2011 में विशिष्ट योगदान देने पर, श्रीमती उषा टेलर प्रधानाध्यापिका रा.बा.मा.वि., कुरज को साक्षरता नारी सशक्तिकरण भ्रूण हत्या रोकने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने निर्धन, असहाय छात्राओं को आर्थिक सहयोग तथा माध्यमिक शिक्षा बोर्ड़ द्वारा आयोजित सर्वश्रेष्ठ विधालय में जिला स्तर पर प्रथम स्थान पर, श्रीमती अनिता परियानी विशिष्ठ प्रशिक्षिका जागृति माध्यमिक विशिष्ठ राजसमंद को मानसिक विमंदित बच्चों को रखना एवं उन्हे शिक्षण प्रशिक्षण करवाने हेतु उत्कृष्ट कार्य करने पर, भज्जाराम कुम्हार कनिष्ठ लिपिक, राउमावि केलवाडा को विधालय में कार्यालय संबंधी समस्त कार्य अपनी कुशलता व पूर्ण ईमानदारी एवं निष्ठा के साथ समय पर पूर्ण करने पर सम्मानित किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि राधेश्याम शर्मा वरिष्ठ लिपिक जिला परिषद् राजसमंद को मुख्यमंत्री आवास योजना में उत्कृष्ट कार्य हेतु, भानुप्रकाश माथुर सहायक अभियंता सार्वजनिक निर्माण विभाग राजसमंद को लोक निर्माण विभाग में समय पर कार्यो का निष्पादन करने पर, रजत भटनागर जिला समन्वयक (किशोरी बालिका मण्डल परियोजना) को ग्राम पंचायत स्तर पर 124 किशोरी बालिका मंडल गठन करने तथा 665 किशोरियों को औपचारिक तथा 748 को अनौपचारिक शिक्षा से जोडने पर, मांगीदास वैरागी ग्राम सेवक पदेन सचिव ग्राम पंचायत केलवा पं0स0 राजसमंद को जन्म-मृत्यु पंजीयन कार्यक्रम में उत्कृष्ट कार्यशैली का परिचय देते हुए 316 के लक्ष्य के विरूद्ध 2076 पंजीयन करने का सराहनीय कार्य करने पर, कंवर लाल रेगर वरिष्ठ लिपिक, पंचायत समिति रेलमगरा को पंचायत समिति में केशियर कम्प्युटर संबंधी कार्य बैठकों का संचालन, जांचों के साथ-साथ लेखाकार का अतिरिक्त प्रभार समय पर पूर्ण करने एवं उत्कृष्ट कार्य करने पर सम्मानित किया जाएगा।

ड़ॉ0 जगदीश जीनगर पशु चिकित्सा अधिकारी राजकीय पशु चिकित्सालय, केलवा (राजसमंद) को विगत तीन वर्षो से कृत्रिम गर्भाधान के लक्ष्यों में 100 प्रतिशत से अधिक की उपलब्धि अर्जित करने पर, सुखदेव सिंह चारण व0लि0, नगरपालिका, राजसमंद को पालिका में तामीरात शाखा में सत्यनिष्ठा से कार्य कर अधिक राजस्व वसूली का योगदान देने पर, श्रीमती गीता देवी़ सफाई कर्मचारी, नगरपालिका राजसमंद को पालिका में कार्यरत रहते हुए सफाई का सर्वश्रेष्ठ एवं सत्य निष्ठा से कार्य करने पर, श्री लक्ष्मीनारायण वैष्णव, कार्यालय सहायक, नगरपालिका, आमेट को पालिका संबंधी समस्त कार्य पूर्ण निष्ठा एवं कर्त्तव्यपरायणता से करने पर, बाबुलाल शर्मा सहायक प्रबन्धक (प्रशासन) जे.के.टायर इण्डस्ट्रीज लिमिटेड़ कांकरोली को राजसमंद क्षेत्र में हरित क्रान्ति के दौरान 10,000 वृक्षारोपण करवाना, एमडी ग्राम में पशुओं के लिये पीने के पानी हेतु टैकरों द्वारा पेयजल उपलब्ध कराना तथा वीवीआईपी विजिट के दौरान आवासीय प्रबन्ध व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने पर, प्रशांत छाबडा को सड़क दुर्घटना के दौरान दुर्घटनाग्रस्त लोगो को समय पर अस्पताल पहुंचाने में साहसिक भूमिका अदा करने एवं कम्पनी द्वारा चलाई जा रही जन कल्याणकारी योजनाओं में महति योगदान दिये जाने पर, जीवनसिंह रावत, क0लि0, उप वन संरक्षक राजसमंद को कर्मठ कार्मिक, कठिन परिश्रम कर वनरक्षक भर्ती परीक्षा में उल्लेखनीय एवं सफलतापूर्वक कार्य करने पर सम्मानित किया जाएगा।
इसी प्रकार श्रीमती मंजु कंुवर साथिन ग्राम अमलोई ग्राम पंचायत राज्यावास तहसील-राजसमंद को महिला स्वयं सहायता समूह अन्तर्गत 100 महिलाओं का रोजगारोन्मुखी बनाने एवं अपने दायित्वों का निर्वहन पूर्ण निष्ठा व ईमानदारी से करने तथा उत्तम कार्यशैली एवं सराहनीय कार्य करने पर, भवानी शंकर कुमावत स्टेनोग्राफर, जन स्वा0अभि0वि0 राजसमंद को जिले के विधालयों, आंगनवाडी केन्द्रों व ग्राम/मजरे/ढाणियों में पेयजल उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण योगदान देने पर, अवन्ती लाल जायसवाल, प्रभारी राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम राजसमंद को सुप्रसिद्ध तीर्थ मेला चारभुजा विधानसभा क्षैत्र कुम्भलगढ़ में मेला प्रशासन से अनुरोध कर निजी वाहनों को परमिट जारी नहीं करा कर परिवहन निगम द्वारा समस्त मेला का यात्री भार उठा परिवहन निगम को आर्थिक लाभ के साथ साथ मेले में अच्छी यातायात सुविधायें देने, जन सुविधा हेतु वरिष्ठ नागरिक, विकलांग पास, महावारी पास की सुविधायें उपलब्ध कराने पर, भगवती लाल लौहार कृषि पर्यवेक्षक, मुख्यालय जूणदा तहसील-रेलमगरा को जल के कुशलतम एवं संतुलित प्रयोग हेतु जूणदा में कृषकों को बूंद-बंूद सिंचाई द्वारा कृषि को बढ़ावा देने हेतु कृषकों को बंूद-बंूद संयत्र लगाने को प्रेरित कर 98.0 हैक्टयर में अनुदान पर सयंत्रो की स्थापना कराने के साथ ही कृषि विस्तार गतिविधियों का कृषकों में व्यापक प्रचार-प्रसार कर लक्ष्यों से अधिक सराहनीय योगदान करने पर, इन्द्रसिंह आफिस कानूनगों भू-अभिलेख निरीक्षक तहसील कार्यालय भीम को कर्त्तव्य के प्रति समर्पण भाव आज्ञाकारिता व समय की पाबन्दी व जनता के साथ मधुर व्यवहार होने पर, जसवंत सिंह, हैड कानिस्टेबल 732 जिला विेशेष शाखा, कार्यालय जिला पुलिस अधीक्षक, राजसमंद को महामहिम राष्ट्रपति महोदया, भारत के दिवेर यात्रा कार्यक्रम के दौरान पुलिस प्रबंध की समय पर एवं सही रूपरेखा तैयार करने एवं राजस्थान लोक सेवा प्रदान करने की गारंटी अधिनियम के तहत पुलिस विभाग द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाओं को अधिनियम में प्रदान की गई समयावधि के भीतर संपादित करने में महत्वपूर्ण एवं सराहनीय कार्य करने पर, फतह लाल, कानिस्टेबल 678 कार्य प्रणाली शाखा, कार्यालय जिला पुलिस अधीक्षक, राजसमंद को पुलिस कार्य योजना से संबंधित राजस्थान पुलिस वेबसाईट पर जिले के सभी आंकडो का समयबद्ध तरीके से अपलोड करने एवं वेबसाईट को समय पर एवं सही रूप से अपडेट रखने में महत्वपूर्ण एवं सराहनीय कार्य करने पर, श्री इन्द्राज सैनी कनिष्ठ लेखाकार कार्यालय जिला पुलिस अधीक्षक राजसमन्द को लेखा संबंधी कार्यों का समय पर निस्तारण करने पर, वैभव गौड़ शाखा प्रबन्धक उदयपुर सैन्ट्रल कॉ ऑपरेटिव बैंक लि0 शाखा कांकरोली राजसमन्द को जिला प्रशासन द्वारा दिये गये कार्य को अपने बैंक कार्य के साथ साथ अल्पावधि में पूर्ण कर सराहनीय कार्य करने, मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना में 3200 बीपीएल सदस्यों को 723.88 लाख रूपये जिले की पंचायत समितियों में तुरन्त स्थानान्तरित कर सम्बन्धितों को लाभान्वित करने पर, रामनिवास शर्मा सहायक अभियन्ता, सा0नि0वि0 देवगढ़ को राष्ट्रपति की सम्पन्न यात्रा मेवा का मथारा दिवेर पर हेलीपेड, बेरिकेडिंग, सड़क सुधार सम्बन्धी समस्त व्यवस्था अल्पसमय में सम्पादित करने पर, विकास महात्मा क0लि0, राजस्व अनुभाग,कलेक्ट्रेट राजसमन्द को राजस्व अनुभाग में उत्कृष्ट कार्य करने पर, श्री मोहनलाल तेली पटवारी राज्यावास तहसील राजसमन्द को जमाबन्दी, जिन्स गिरदावरी, चुनाव तथा जनगणना इत्यादि कार्य समय पर पूर्ण किये जाने पर, डॉ. कैलाश ब्रजवासी निदेशक जतन संस्थान राजसमन्द संस्थान द्वारा विगत 10 वर्षों से राजसमन्द जिले में महत्वपूर्ण रूप से सक्रिय रूप से कार्य करने एवं जनहित कार्यों में सफलता प्राप्त करने पर, शीतल वैष्णव प्रोजेक्शनिष्ट, जिला सूचना एवं जन सम्पर्क कार्यालय, राजसमन्द को समाचार संकलन बैठकें विशिष्ट व्यक्तियों की यात्रा कवरेज के क्षेत्र मे उल्लेखनीय कार्य करने पर, आनन्द श्रोत्रिय पत्रकार सहारा समय टी.वी. राजसमंद को आमजन की समस्याओं को समय-समय पर खबरों में दिखाना तथा पत्रकारिता के क्षेत्र में पूर्ण निष्ठा व ईमानदारी से कार्य करने पर तथा लक्ष्मणसिंह राठौंड़ पत्रकार दैनिक भास्कर राजसमंद को स्मृति चिन्ह एवं प्रसंषा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया जाएगा।

Thursday, September 8, 2011

ठाठ-बाठ से निकली भगवान चारभुजानाथ की शोभायात्रा

राजसमंद, । धर्मनगरी चारभुजा में जलझुलनी एकादशी पर गुरुवार को मेवाड़ के प्रसिद्ध धार्मिक लक्खी मेले में श्रद्धा का ज्वार उमड़ पड़ा। धर्मनगरी छोगाला छेल के जयकारों से गूंजती रही। इस अवसर पर भगवान चारभुजानाथ की पूरे ठाठ-बाठ से शोभायात्रा निकाली गई तथा भगवान को परम्परागत तरीके से दूधतलाई में पवित्र स्नान कराया गया।
भगवान के दर्शनार्थ लोगों का सैलाब सुबह चार बजे से ही मंदिर परिसर में उमडऩा शुरू हो गया। सुबह पांच बजे भगवान चारभुजा के मंगला आरती के दर्शन खुले जो एक घंटे तक रहे। इसके बाद साढ़े आठ बजे से ग्यारह बजे तक भी दर्शन खुले रहे इसके साथ ही मंदिर परिसर में पूजारीगण शोभायात्रा के लिए भगवान को श्रृंगारित करने में जुटे रहे। परम्परानुसार भगवान चतुर्भुज की बाल स्वरूप प्रतिमा को वस्त्र एवं आभुषणों का श्रृंगार धराने के बाद स्वर्ण पालकी में बिराजित किया गया। इस दौरान मंदिर चौक में हजारों की तादाद में भक्तजन जमा हो गए जो चारभुजानाथ के गगनभेदी जयकारों के साथ नाच गाकर असीम हर्ष को प्रदर्शित कर रहे थे। सभी गुलाल से सरोबार होकर भक्तिभाव में लीन दिखाई दिए। सभी की निगाहें मंदिर द्वार पर टिकी थी कारण उन्हें भगवान की पालकी के आने का इंतजार था। पालकी के आने का ज्यों ज्यों समय नजदीक आता गया। श्रद्धालुओं की उत्सुकता द्विगुणित होती गई। ठीक पौने बारह बजे मंदिर से पूजारीगण बाहर आए तो उन्हें पालकी के आने का आभास हो गया। दर्शनों की उत्सुकता से वशीभुत भक्तजनों ने ‘छोगाला छेल की जै,’ ‘हाथी घोड़ा पालकी, जै कन्हैयालाल की’ आदि के जयकारे लगाए। जयकारों के समवेत स्वर से समूचा परिवेश गुंजायमान हो उठा। कुछ ही पल बाद भगवान की स्वर्ण पालकी मंदिर की सीढिय़ों से होते हुए चौक की ओर बढ़ती दिखी तो वहां मौजूद हरेक भक्तजन भगवान चतरर्भुज के स्वरूप को एक पल निहारने के लिए आतुर हो उठा किसी ने निकट से निहार कर स्वयं को धन्य माना तो किसी ने भीड़ की वजह से दूर से नतमस्तक किया। इस बीच शोभायात्रा की रवानगी हो गई। शोभायात्रा में सबसे आगे निवाण एवं ऊंट पर नंगारखाना, गजराज, अश्व एवं प्रभु के लिए रजत पालकी शामिल थी तो पीछे बैण्डबाजे भक्तिगीतों की स्वर लहरियां बिखरते चल रहे थे। उनके पीछे पारम्परिक वेशभुषा में सैंकड़ो पूजारीगण चल रहे थे जो अपने गले में सोने की कंठी व डोरा तथा पगड़ी एवं पछेवड़ी व चन्द्रमा धारण किए हुए थे। पूजारीगण हाथों में चांदी की छंडिया, गोटे, तलवारे, भाले आदि लिए पालकी के आगे भगवान की सेवामें खम्माघणी करते हुए चल रहे थे। मार्ग में छतरी पर भगवान को अमल का भोग धराया गया। शोभायात्रा के दूधतलाई पहुंचने पर पूजारीगण भगवान को पवित्र स्नान कराने दौड़ पड़े। भक्तजनों में भी होड लगी हुई थी कि वे भी भगवान को पानी के छींटे लगाकर स्नान कराएं। स्नान कराने के बाद पूजारीगण बाल स्वरूप प्रतिमा को छतरी में लाए तथा प्रभु के भीगे वस्त्रों को उतारा। पूजारी गोर्वधन राजावत ने प्रतिमा को केवड़े के फुल में लपेट कर अपने सिर पर धारण कर दूधतलाई की परिक्रमा शुरू की। परिक्रमा के दौरान दूधतलाई के पानी में खड़े श्रद्धालुओं ने प्रतिमा व पूजारीगण पर पानी उड़ेल कर आनन्द लिया। परिक्रमा मार्ग में स्थित छतरी में परम्परानुसार झीलवाड़ा ठिकाने की ओर से दौलतसिंह सौलंकी ने भगवान को अमल अरोगाई।
परिक्रमा पूर्ण होने पर पूजारीगण ने प्रभु को नए वस्त्र और आभूषणों से श्रृंगारित कर पूजारियों ने हरजस गाया। रजत पालकी में बिराजित किया तथा मंदिर के लिए रवानगी की। पूजारीगण भजन कीर्तन करते वापस मंदिर पहुंचे तथा आरती के साथ भगवान की बाल प्रतिमा को पुन: गर्भ गृह में बिराजित किया।
किरण ने किए चारभुजानाथ के दर्शन : चारभुजा में गुरुवार को आयोजित जलझुलनी एकादशी मेले में राजसमन्द विधायक किरण माहेश्वरी व अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी भागीदारी की तथा भगवान चारभुजानाथ के दर्शन किए। किरण के साथ पूर्व प्रधान कुम्भलगढ़ कमला जोशी, पूर्व उप प्रधान निर्भय सिंह झाला, पूर्व जिला परिषद सदस्य ललित चोरडिय़ा आदि ने भी भगवान के दर्शन किए।
जयकारों से गुंजती रही धर्मनगरी, दिनभर रही रैलमपेल : जलझुलनी एकादशी के अवसर पर धर्मनगरी में दिनभर रैलमपेल रही एवं समूचा परिवेश भगवान चारभुजानाथ के जयकारों से गुंजायमान रहा। सुबह से ही धर्मनगरी में श्रद्धालुओं की अपार आवक शुरू हो गई थी जो दोपहर तक जारी रही। बस स्टेण्ड से मंदिर तक एवं मंदिर के आसपास के क्षेत्र में दिनभर भारी रेलमपेल लगी रही। ग्यारह बजे बाद से एक घण्टे तक तो बस स्टेण्ड से मंदिर तक रास्ते में तिलभर भी जगह खाली नहीं थी। शोभायात्रा के दौरान दूधतलाई जाने के लिए मुख्य मार्ग के अलावा यहां कि संकड़ी गलियों एवं इससे आगे दो अन्य वैकल्पिक मार्गो पर भी लोगों की आवाजाही लगी रही।
गुलाल से श्रद्धालु सरोबार, रास्ते भी रंग गए : जलझुलनी एकादशी के मेले के अवसर पर धर्मनगरी में खुब गुलाल उड़ी, इस दौरान सभी श्रद्धालु सरोबार थे तो रास्ते रंग गए। शोभायात्रा से पूर्व एक घंटे तक मंदिर चौक में प्रभु की पालकी के इंतजार में आतुर श्रद्धालुओं ने इतनी गुलाल उड़ेली की सभी श्रद्धालु तो इससे सरोबार हुए ही पूरा चौक भी रंगीन हो गया। यही नहीं शोभायात्रा के मार्ग एवं अन्य गली मौहल्लों में भी रास्ते गुलाल से सरोबार हो गए।
प्रशासन, पुलिस ने की चौकसी : धर्मनगरी चारभुजा में जलझुलनी एकादशी मेले में कानूनी एवं व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन एवं पुलिस चौकस रही। मंदिर के पास नियंत्रण स्थापित किया गया जहां से व्यवस्था का संचालन किया गया।


व्यक्ति का तर्कवाद होना आवश्यकः आचार्यश्री महाश्रमण

तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें अधिष्ठाता आचार्यश्री महाश्रमण ने कहा कि आज के परिवेश में व्यक्ति का तर्कवादी होना अत्यंत आवश्यक है। आध्यात्म के क्षेत्र में तार्किकता का भाव होना चाहिए। मैं स्वयं तर्कवाद को काम में लेता हंू। तर्कवाद मनुष्य को ज्ञानी और विषयविद् बनाने में मदद करता है। आचार्यश्री ने उक्त उद्गार यहां तेरापंथ समवसरण में चल रहे चातुर्मास के दौरान अमृत महोत्सव के दूसरे दिन गुरुवार को आयोजित कार्यक्रम में मौजूद हजारों लोगांे को संबोधित करते हुए व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि प्रतिस्पर्द्धात्मक इस युग में आदमी के दिमाग में तर्क पैदा होना चाहिए। तार्किक व्यक्ति बात को अच्छी तरह से समझता है और परस्पर बातचीत में अक्सर ऐसा देखने को मिलता है कि सामने वाला तर्क की बातों का कोई जवाब नहीं दे पाता और निरुत्तर हो जाता है। जो व्यक्ति तर्क करना नहीं जानता वह मूक प्राणी है। आज जिस व्यक्ति के पास भाषा है, लेकिन उस पर नियंत्रण नहीं है तो भाषा का ज्ञान होना अनावश्यक हो सकता है। जिसके पास शब्द भंडार है वह ब्रहृा है। जिसके पास साहित्यक शक्ति नहीं है वह पंगु है और जिसके पास तर्क नहीं है। वह अपनी बात कहने में असमर्थ होता है। आचार्यश्री ने कहा कि अध्यात्म के क्षेत्र में श्रद्धा का बडा महत्व है। दो प्रकार के पदार्थ है हेतु गम्य और अहेतु गम्य। आचार्यश्री भिक्षु की भूमि पर बैठे है। वे बेजोड थे और उनमें श्रद्धा भरी हुई थी। तेरापंथ में तर्क और श्रद्धा दोनों का प्रयोग होता है। धर्म संघ में सर्वोच्च आचार्य होते है। मेरा 50 वां वर्ष चल रहा है। जन्म दिन को मनाना आवश्यक नहीं मानता। जन्म लेना बडी बात नहीं है। कृतत्व का शताब्दी समारोह मनाया जाए तो अच्छी बात होती है। मेरा अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है। मैं संघ की बात को ना नहीं कह सकता। उन्होंने कहा कि 12 व्रतों को धारण करने की लहर चल रही है। नशामुक्ति का कार्य भी चल रहा है। संस्कृत भाषा का अभ्यास मंद न पडे। इस दिशा में ध्यान देने की आवश्यकता है। इसका अभ्यास निरन्तर चलता रहना चाहिए। मैं अनुभव करता हंू कि तेरापंथ के आचार्य के पास कितनी शक्ति है। यह बडा वैभव है। इस वैभव का उपयोग धर्मसंघ के विकास में होता रहे और समाज विकास के पथ पर अग्रसर हो। केन्द्रीय संस्थाएं निरन्तर काम कर रही है। यह फूलों से भी बडी संस्था संस्था है। यह नीति निर्धारण का मंच है। महासभा भी कार्य कर रही है। तेरापंथ युवक परिषद् में युवाओं की फौज है। एक अच्छा नेटवर्क बना हुआ है। यह युवा हमारी शक्ति है। इस अवसर पर साघ्वी सुमतिप्रभा, साध्वी शशिप्रभा, साध्वी सदुप्रभा, साध्वी स्वस्तिकप्रभा, मुनि पुलकित कुमार, शासन गौरव मुनि धनंजय कुमार, मुनि अशोककुमार, साध्वी सुभ्रयशा और मुनि महावीर ने गीत का संगान और अपने विचार प्रकट किए। प्रारंभ में मुमुक्षु परिवार की ओर से मंगलाचरण प्रस्तुत किया गया और अमृत महोत्सव के दूसरे दिन का आगाज हुआ। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में तेरापंथ विकास परिषद् की ओर से कन्हैयालाल छाजेड, जय तुलसी फाउन्डेशन की ओर से हीरालाल मालू, जैन श्वेताम्बर तेरापंथी महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष चैनरूप चंडालिया, जैन विश्व भारती के विजयसिंह चौरडिया, जैन विश्वभारती विश्वविद्यालय की कुलपति समकी चरित्रप्रज्ञा, अणुव्रत महासमिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल गोलछा, राष्ट्रीय अणुव्रत शिक्षक संसद के धर्मचंद जैन अनजाना, पारमार्थिक शिक्षक संस्था के बजरंग जैन, प्रेक्षा विश्व भारती अहमदाबाद के जसराज वुरड, तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के सलील लोढा, अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के अध्यक्ष गौतम डागा और अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की राष्ट्रीय अध्यक्ष कनक परमेचा ने विचार व्यक्त किए।
आचार्य तुलसी कर्तव्य पुरस्कार उदयपुर की नीलिमा खेतान को
इस अवसर पर अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल की राष्ट्रीय अध्यक्ष कनक परमेचा ने वार्षिक पुरस्कारों की घोषणा करते हुए बताया कि इस वर्ष का आचार्य तुलसी व्यक्तित्व पुरस्कार सेवा सदन संस्था उदयपुर की नीलिमा खेतान को उनके द्वारा आदिवासी क्षेत्रों के विकास में किए गए कार्यों को लेकर दिया जाएगा। इसके साथ ही श्राविका गौरव पुरस्कार मुंबई की प्रेम सिसोदिया और सुशीला कच्छारा को दिया जाएगा। प्रतिभा पुरस्कार मीनाक्षी बुतोडिया को प्रदान किया जाएगा। तेरापंथ युवक परिषद् की ओर से इस वर्ष प्रदान किए जाने वाले पुरस्कारों की भी घोषणा कार्यक्रम के दौरान की गई। आचार्य महाप्रज्ञ प्रतिभा पुरस्कार प्रमोद घोडावत व आचार्य महाश्रमण पुरस्कार जयपुर के सुधीर चौरडिया को दिया जाएगा।
रक्तदान शिविर आज
अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् व तेरापंथ किशोर मंडल के तत्वावधान में आचार्य महाश्रमण अमृत महोत्सव के द्वितीय चरण में शुक्रवार को केलवा में रक्त दान शिविर आयोजित किया जाएगा। अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद् के सदस्य और शिविर संयोजक डॉ. विमल कावडिया ने बताया कि सुबह नौ बजे से दोपहर तीन बजे तक आचार्यश्री महाश्रमण के प्रवचन पांडाल के पास स्थित का्रॅन्फेन्स हॉल में शिविर आयोजित होगा। केलवा तेयुप के अध्यक्ष विकास कोठारी ने बताया कि इस शिविर में 18 से 55 वर्ष की आयु और 40 किलोग्राम से अधिक वजन वाले स्त्री-पुरूष रक्तदान कर सकेगा। तेयुप मंत्री लक्की कोठारी ने बताया कि तेरापंथ युवक परिषद् के विशेष सहयोग से आयोजित होने वाले इस शिविर में भीलवाडा, गंगापुर, ब्यावर, भीम, देवगढ, राजसमंद, केलवा, उदयपुर, सरदारगढ, दिवेर, नाथद्वारा, आमेट, रेलमगरा, शिशोदा, चित्तौडगढ और आसींद आदि युवक परिषद् की सहभागिता रहेगी।


Wednesday, September 7, 2011

केलवा में गणपति विसर्जन

भिक्षु भूमि पर अध्यात्म का नया अध्याय अंकित


देशभर में क्रांतिभूमि का पर्याय बन चुकी केलवा की तपोभूमि पर बुधवार को आध्यात्म का एक ओर नया अध्याय जुड गया। मौका भी ऐसा ही कुछ खास था दो मुमुक्षुओं की दीक्षा समारोह का। अभूतपूर्व जनमैदिनी की साक्षी में तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें अधिष्ठाता आचार्यश्री महाश्रमण ने दोनों को दीक्षा प्रदान करते हुए संयम के मार्ग पर चलने की अनुमति दी और इस तरह सांसारिक जीवन को त्याग कर अध्यात्म के मार्ग पर चले मुमुक्षु अश्विनी का नामकरण करते हुए मुनि अतुलकुमार और मुमुक्षु चेतना का नाम साध्वी चैतन्ययशा दिया।
कस्बे के तेरापंथ समवसरण में सुबह नौ बजे शुरू हुए दीक्षा समारोह में आचार्यश्री ने दो जैन दीक्षा प्रदान की। उन्होंने पंजाब के मुमुक्षु अश्विनी एवं उदयपुर जिले के सायरा निवासी मुमुक्षु चेतना को दीक्षा प्रदान करते हुए कहा कि तेरापंथ की दीक्षा में बहुत पारदर्शिता होती है। अनेक बार स्वर उठता है कि प्रलोभन, जबरदस्ती सन्यासी बना दिया जाता है। इस तरह के प्रयोग तेरापंथ में मान्य नहीं हैं। प्रलोभन देकर दीक्षा देना मुझे पसंद नहीं है। तेरापंथ में प्रारंभ से ही इस पर ध्यान दिया गया है। इसमें लिखित और मौखिक आज्ञा अभिभावकों से ली जाती है। दीक्षार्थी की परीक्षा होती है। उसके बाद योग्य होने पर दीक्षा दी जाती है। उन्होंने हजारों की जनमैदिनी की उपस्थिति में स्पष्ट शब्दों में कहा कि तेरापंथ में दीक्षा होना सरल बात नहीं है। जो भाग्यशाली होता है वही इस संघ में दीक्षा ले सकता है। यहां दीक्षा लेने के बाद गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण करना होता है। अपनी इच्छा गुरु के सम्मुख निवेदित कर सकता है। पर जो गुरु का निर्णय होगा उसे स्वीकार करना जरुरी होता है। आचार्यश्री ने कहा कि बुद्धिमान लोग तर्क में जीते है। यानि इंन्द्रियों और मन के क्षेत्र में जीते है। आत्मा इंद्रियां तीन क्षेत्र उनसे दूर है। दीक्षा तर्कातीत, इंद्रियांतीत में प्रवेश का द्वार है। दीक्षा लेना बडे भाग्य की बात है। आज दो जन दीक्षित होने जा रहे है। तेरापंथ में बहुत पारदर्शिता है। यहां पर प्रलोभन देकर, जबरदस्ती कर दीक्षा नहीं दी जाती। प्रलोभन देकर दी जाने वाली दीक्षाओं को मैं उचित नहीं मानता। पारदर्शिता का प्रमाण यह है कि लिखित आज्ञा पत्र। लिखित के साथ सबसे मौखिक आज्ञा भी ली जाती है। आचार्यश्री ने नव दीक्षितों को संबोधन देते हुए कहा कि संयम के प्रति जागरूकता एवं निर्देश संयम से हर क्रिया करनी है। जागरूकता रखनी है। क्षमा, कल्याण, विनम्रता का भाव विकास से मंगलकामना।
केंशलोच संस्कार
आचार्यश्री ने दीक्षार्थी अश्विनी का केंशलोच संस्कार संपन्न करते हुए कहा कि शिष्य की चोटी गुरु के हाथों में आ गई है। अब इस लोच का तात्पर्य है गुरु के अनुशासन में रहना। साध्वी दीक्षा लेने वाली मुमुक्षु चेतना का केंशलोच संस्कार साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा ने किया और प्रतीक तौर पर गुरु चरणों में चोटी समर्पित की।
नामकरण संस्कार
आचार्यश्री ने नवदीक्षितों को नए जन्म का नया नाम प्रदान कर नामकरण संस्कार संपन्न किया। उन्होंने मुमुक्षु अश्विनी को मुनि अतुलकुमार और मुमुक्षु चेतना को साध्वी चैतन्ययशा नाम दिया।
रजोहरण प्रदान किया
आचार्यश्री ने अहिंसा ध्वज रजोहरण को आर्ष वाणी में आशीर्वाद के साथ मुनि अतुलकुमार को प्रदान किया। उन्होंने कहा कि मुनि ज्ञान दर्शन, चरित्र में वर्धमान होता रहे। साध्वी चैतन्ययशा को साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा ने रजारोहण प्रदान किया।
मंत्री मुनि सुमेरमल ने कहा कि दीक्षा एक बदलाव है। बिना बदले दीक्षा तक नहीं पहुंचा जा सकता। अनादि से भक्ति के मार्ग पर चलना दीक्षा है। असंयम से संयम की ओर आने से अर्हता प्राप्त हो सकती है। इस तरह की प्रवृति प्रत्येक व्यक्ति में आए। ऐसी अपेक्षा है।
मेवाड में आ रहा परिवर्तन
साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा ने कहा कि बदलाव दुनिया का शाश्वत विषय है। समय सब को बदलने के लिए विवश कर देता है। वह स्वयं नहीं बदलता। वह देखता रहता है। मेवाड में बहुत कुछ बदलाव आ गया है। जब 51 वर्ष पूर्व मेरी दीक्षा हुई थी उस समय मेवाड का परिवेश अलग था और अब अलग है। हमें यह सोचना है कि बदलाव कहां जा रहा है। हमें भीतर से बदलाव करना है। दीक्षा एक मार्ग है संयम पर चलने का। स्वयं की खोज के लिए जिस दिशा में प्रस्थान होता है वह दीक्षा है। भारतीय संस्कृति त्याग की संस्कृति हैं इस संस्कृति में दीक्षा का बडा महत्व है। यहां दीक्षा का अर्थ है गुरु चरणों में सब कुछ समर्पित कर देना। दीक्षा लेने के बाद व्यक्ति अपने संदर्भ में कोई निर्णय नहीं ले सकता। अपनी बात गुरु को निवेदित कर सकता है पर निर्णय गुरु का होता है। उस निर्णय के अनुसार जिसमें चलने की क्षमता होती है वही तेरापंथ में दीक्षित होने का अधिकारी होता है। दीक्षा समारोह में महिला मंडल की ओर से गीत का संगान किया गया। इस अवसर पर साध्वी आरोग्यश्री, साध्वी सुमुदाय, साध्वी जिनप्रभा, मुनि शुभंकर, व्यवस्था समिति के अध्यक्ष महेन्द्र कोठारी, बाबूलाल कोठारी, स्वागताध्यक्ष परमेश्वर बोहरा, दीक्षार्थी अश्विनी, दीक्षार्थी चेतना, मुनि तन्मय, मुनि हितेन्द्र ने भी विचार प्रकट किए। कन्हैया लाल छाजेड ने लिखित आज्ञा पत्र का वाचन किया। लिखित आज्ञा पत्रों को दीक्षार्थियों के अभिभावकों द्वारा आचार्यश्री के चरणों में समर्पित किए गए। संयोजन मुनि मोहजीतकुमार ने किया।
उमडा जन सैलाब
सात वर्ष बाद मेवाड की क्रांतिभूति केलवा में दीक्षा समारोह को लेकर लोगों का हुजूम उमड पडा। सवेर दस बजे तक तो यह स्थिति हो गई कि सडक पर तिल रखने तक की जगह नहीं थी। समारोह स्थल खचाखच भरा हुआ था। लोग खडे रहकर इस दीक्षा के साक्षी बनने को आतुर थे।


Tuesday, September 6, 2011

अनुशासनात्मक विकास महत्वपूर्णः आचार्यश्री महाश्रमण

तेरापंथ के 11वें अधिष्ठाता आचार्यश्री महाश्रमण ने कहा कि अनुशासन मूल मंत्र है। फल और फूल उस वृक्ष का विकास है। जब मूल नहीं बचेगा तो फल और फूल कैसे प्राप्त किया जा सकता है। तेरापंथ में अनुशासन का बहु विकास हो रहा है, जो बहुत महत्वपूर्ण है। जिस संगठन में इस ओर ध्यान दिया जाता है वह विकास के नए आयाम उद्घाटित कर सकता है।
आचार्यश्री ने उक्त उद्गार यहां तेरापंथ समवसरण में चल रहे चातुर्मास के दौरान मंगलवार को आयोजित विकास महोत्सव को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि तेरापंथ में विकास के हर कोण पर गहराई से ध्यान दिया जाता है। हमारे यहां पर युवा और भावी पीढी को संस्कारी बनाने के लिए ज्ञान शाला का एक महत्वपूर्ण उपक्रम संचालित हो रहा है। जिस समाज और राष्ट्र के युवा और बाल पीढी में संस्कारों के विकास पर ध्यान दिया जाता है वह भविष्य को उज्जवल बना लेता है। अन्यथा उज्जवल भविष्य पर प्रश्नचिन्ह लग जाता है।
आचार्यश्री ने ज्ञान शाला के माध्यम से बच्चों में संस्कार निर्माण करने वाले कार्यकर्ताओं को साधुवाद देते हुए कहा कि व्यक्ति को नाम संपति से दूर रहकर काम पर ध्यान देना चाहिए। जब काम बोलेगा तो उसकी आवाज दूर-दूर तक अपने आप चली जाएगी। उन्होंने कहा कि जैन विश्व भारती एवं जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय द्वारा जैन विद्या के प्रसार का महत्वपूर्ण कार्य हो रहा है। इस पर ओर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है। शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमण ने विकास महोत्सव के मूल में आचार्यश्री तुलसी के पदाभिषेक दिवस का योग होने का उल्लेख करते हुए कहा कि गुरुदेव तुलसी बहुत प्रबुद्ध और ंिचंतनशील थे। वे यह जानते थे कि किस समय कौनसा कार्य करना है। 22 वर्ष की उम्र में तेरापंथ का आचार्य बन जाना विलक्षण घटना है। सबसे ज्यादा तेरापंथ का शासन करने के बाद पद का विसर्जन कर दिया यह भी अनाशक्ति का दुर्लभ प्रयोग है। आचार्यश्री महाप्रज्ञ ने आचार्य बनने के बाद गुरुदेव तुलसी के पदारोहण दिवस को विकास महोत्सव के तौर पर मनाने की शुरूआत कर नई सोच प्रदान की। यह महोत्सव तेरापंथ के विकास का प्रतीक है। आज के दिन सभी संस्थाओं को समीक्षा करनी चाहिए कि कितना विकास किया है। विकास परिषद् इस महोत्सव से जुडी संस्था है। यह संस्था सभी की नीति वियामक है।
संघ की मौलिकता बरकरार रहे
साध्वी प्रमुखा कनकप्रभा ने हम विकास के पथ पर आगे और तेरापंथ धर्मसंघ की मौलिकता बरकरार रहे। इस दिशा में ध्यान देने की आवश्यकता है। हमारा संघ विलक्षणता से परिपूर्ण है। यंू तो जैन समाज में कई धर्म संघ क्रियाशील है, लेकिन तेरापंथ धर्म संघ ने एक अलग ही पहचान कायम की हैं। इसे सतत् क्रियाशील बनाए रखने की आवश्यकता है। आचार्यश्री भिक्षु ने इस संघ की नींव रखते समय जिस तरह के संघ की कल्पना की थी। वह आज सभी के सामने है। वे स्वयं विलक्षण प्रतिभा के धनी थे और उसी तरह विलक्षण संघ के विकास में अपना जीवन न्यौछावर कर दिया। उन्होंने कहा कि ढाई सौ वर्ष पुराने इस संघ में यंू तो अनेक आचार्यों ने इसके विकास में अपना योगदान दिया, लेकिन तीन आचार्यों आचार्यश्री भिक्षु, जयाचार्य और गुरुदेव आचार्यश्री तुलसी ने इसे ऊंचाईयों तक पहुंचाने का काम किया। आज तेरापंथ धर्मसंघ विकास का प्रतीक बन गया है। संघ में विकास की अवधारणाएं गुरुदेव तुलसी के समय में बनी थी। वे कहा करते थे कि इसके विकास का जिम्मा केवल साधु-संतों का ही नहीं है। इसमें श्रावक समाज को सहभागिता का निर्वाह करने की आवश्यकता है। मंत्री मुनि सुमेरमल ने कहा कि तेरापंथ धर्मसंघ निरन्तर विकास के पथ की ओर अग्रसर है। प्रत्येक व्यक्ति के मन में यह धारणा होती है कि मैं बुलन्दियों तक पहुंच जाऊं। इसके लिए कार्य को लक्ष्य देने की आवश्यकता है। काम बिखरा होगा तो हम लक्ष्य की ओर नहीं बढ पाएंगे। उन्होंने अनावश्यक प्रवृतियों से बचने की सीख देते हुए कहा कि हम सब आचार्यश्री महाश्रमण के नेतृत्व में आगे बढ रहे है। धीरे-धीरे हम शिखर तक पहुंच जाएंगे। तेरापंथ धर्मसंघ ऐसा संघ है, जहां एक नेतृत्व है लक्ष्य है उसे अर्जित करना है। इस अवसर पर साध्वी फूलकंवर के परिजनों ने उनके जीवन से जुडी एक पुस्तक आचार्यश्री को भेंट की, जिसका विमोचन किया गया। समारोह में मुनि विश्रुतकुमार, मुनि सुखलाल, महावीरकुमार, विकास महोत्सव के संयोजक लालचंद सिंघवी ने भी विचार प्रकट किए। मुनि विजयकुमार ने गीत का संगान किया। संयोजन मुनि मोहजीत कुमार ने किया।
शासनश्री की उपाधि से अलंकृत
आचार्यश्री महाश्रमण ने प्रवचन के दौरान चार मुनियों को उनकी कार्यक्षमता और विशेषताओं का बखान करते हुए शासनश्री की उपाधि से अलंकृत किया। इस उपाधि से सुशोभित होने वाले मुनियों में मुनि सुमेरमल सुदर्शन, मुुनि सुखलाल, मुनि पानमल एवं मुनि किशनलाल शामिल है। इनके अलावा मुनि कीर्तिकुमार और मुनि विश्रुत कुमार को आचार्यश्री ने अनिश्चितकाल तक समुचर्य कार्य की बक्शीश दी।

Monday, September 5, 2011

राजसमंद पालिकाध्यक्ष पालीवाल ने लिया आशीर्वाद

राजसमंद नगरपालिका अध्यक्ष श्रीमती आशा पालीवाल ने सोमवार दोपहर केलवा पहंुचकर तेरापंथ धर्मसंघ के 11वें अधिष्ठाता आचार्यश्री महाश्रमण से आशीर्वाद लिया। उनके साथ मनोनीत पार्षद एवं कांग्रेस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष प्रदीप पालीवाल, पार्षद रमेश पहाडिया और अशोक टांक भी थे। उन्होंने भी आचार्यश्री से आशीर्वाद लिया।
पंच मेवे का भोग
केलवा में इन दिनों गणेश महोत्सव की धूम मची हुई हैं। जीएमएम ग्रुप की ओर से रविवार शाम को विशेष आतिशबाजी की गई। इसके बाद सैंकडों लोगों की मौजूदगी में आरती की गई। इधर, महाराणा प्रताप सेना और शिवदल मेवाड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाले गणेश महोत्सव को लेकर गली और मोहल्लों में आयोजन हो रहे है। सात दिवसीय गणपति महोत्सव के तहत विद्या निकेतन स्कूल के विद्यार्थियों की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। मंगलवार को भजन संध्या होगी। इसमें विनोद गुर्जर की ओर से प्रस्तुति दी जाएगी। बुधवार को गणपति की शोभायात्रा निकाली जाएगी। यह जानकारी महोत्सव के संयोजक कैलाश जोशी ने दी।