Thursday, December 18, 2008

स्टाम्प पेपर का टोटा ही टोटा

राजसमंद । जिला मुख्यालय पर एक माह से स्टाम्प पेपर नहीं मिल रहे। इन दिनों स्टाम्प पेपरों के स्थान पर सादे कागज पर स्पेशल टिकट लगा काम चलाया जा रहा है। शहर में स्टाम्प वेण्डरों के पास एक माह से स्टाम्प पेपर नहीं है। स्टाम्प वेण्डरों ंने बताया कि कोषालय से 10, 20, 50, 100, एक हजार और दस हजार रूपए के स्टाम्प पेपर नहीं मिल रहे। इनकी जगह स्पेशल एडहेसिव टिकिट दिए जा रहे हैं, जिन्हें सादे कागज पर चिपका कर काम चलाया जा रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार स्टाम्प पेपर की आपूर्ति अजमेर स्थित अतिरिक्त महानिरीक्षक पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग से होती है। कोषालय में दो माह से स्टाम्प पेपरों की कमी है। पेपर की अपेक्षा टिकटों का कम उपयोग होता है। ऎसे में टिकटों की खपत के लिए पेपर के स्थान पर कोषालयों को टिकट ही भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा भंडार में पेपर नहीं होने पर भी टिकट थमा दिए जाते हैं। सबसे ज्यादा 10 रूपए मूल्य के स्टाम्प पेपर काम आते हैं। इनका उपयोग शपथ पत्र बनवाने में सबसे ज्यादा होता है। इसके अलावा नॉन ज्यूडिशियल स्टाम्प पेपर का उपयोग रजिस्ट्री, इकरारनामा, शपथ-पत्र, हकरसी के काम लिया जाता है। इन दिनों सभी के लिए टिकट ही काम लिए जा रहे हैं। पेपरों की कमी के कारण वेण्डरों को समस्या का सामना करना पड रहा है। टिकट तभी मान्य होता है जब उस नॉन ज्यूडिशियल, कोषालय और राज्य की सील लगी हो। ऎसे में वेण्डरों को टिकट लेने के लिए अपने साथ सादे कागज भी ले जाने होते हैं। वेण्डरों ने बताया कि यदि दस रूपए मूल्य वाले चार हजार रूपए के 400 टिकट लेने हों तो उन्हें अपने साथ 400 सादे कागज लेकर कोषालय जाना होगा, जहां प्रत्येक टिकट को कागज पर चिपका उस पर उक्त तीनों सीलें उन्हें ही लगानी होगी। वेण्डरों को 499 रूपए तक मूल्य का स्टाम्प पेपर या टिकट बेचने पर दो प्रतिशत कमीशन मिलता है। यानि 10 रूपए मूल्य वाले 400 स्टाम्प बेचने पर 80 रूपए मिलते हैं। वेण्डरों को टिकट के लिए सादे कागज खरीद के लाने होते हैं। चार सौ स्टाम्प के लिए कागज की एक रिम खरीदनी पडती है। इसके लिए वेण्डरों को 120 से 140 रूपए तक चुकाने पडते हैं। ऎसे में वेण्डरों को 40 से 60 रूपए का घाटा उठाना पड रहा है। ऊपर से सील लगाने और रिकार्ड संधारण की झंझट अलग।

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