Sunday, December 6, 2009

इन दो आंखों से संसार देखा है...

कुंवारिया। 'तेरा साथ है तो मुझे क्या कमी है...' प्यासा सावन फिल्म का यह मशहूर नगमा समीपवर्ती खेमाखेडा गांव के एक वृद्ध दंपती को जीने के लिए सम्बल दे रहा है। उम्र के पैंसठ से अघिक बसंत पार करने के बाद किस्मत ने उन पर दु:खों का पहाड तोड दिया।
एक की आंखों की रोशनी चली गई तो दूजे के मुख के बोल, लेकिन दोनों ने हार नहीं मानी। उन्होंने गीत की इस पंक्ति को आधार बना लिया और दोनों एक-दूसरे के पूरक बन कर छोटी-छोटी खुशियां सहेज रहे हैं।
महासतियों की मादडी ग्राम पंचायत के खेमाखेडा भील बस्ती के ये वृद्ध दंपती हैं भीमा भील और वरजू बाई। भीमा की उम्र करीब 65 वर्ष है और वरजूबाई साठ बरस की हो चुकी हैं। दर्द भरी हसरत यह है कि पत्नी देख नहीं सकती और पति बोल नहीं सकता, लेकिन दोनों की जिंदगी में उदासी बिल्कुल नहीं है
भीमा घर की हर आहट को गहराई से सुनता है और हर काम में फुर्ती के साथ अपनी अर्द्धागिनी की मदद करता है।
वहंीं वरजू भी अपने पति की मदद से अपनी तकलीफ भुला कर खुश रहती है। यह दम्पती भले ही अकेले रहतस है, लेकिन दोनों किसी अन्य का सहारा न लेकर गृहस्थी की गाडी खुद ही चलाते हैं। ग्रामीणों ने बताया कि दम्पती को सरकार की ओर से किसी भी प्रकार की आर्थिक मदद अथवा पेंशन नहीं मिलती।


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